हम राज़ है तो रह, तून मेरा खुदा तो ना बन !
बंदगी कि ना आई तू मेरा इम्तहान तो ना बन!!
वीरान इ गुल जो खिलें उन से गुलिस्तां कि जसतजू तो न कर !
ना देेख मेरे माज़ी न मुस्तिकबिल को तू मुज पे मेहरबान ना बन!!
ना सर जुका जो सजदे मैं बशर बा मुश्किलां थे हम !
ना हम को बकर इ ईद तूं कर और रहनुमा बी ना बन !!
गुमनाम शेअर इ बेपरवह मैं माँगा था हम नवाँ !
सारे अकस तो मिटा गया तू अब कारवां तो ना बन !!
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